Phala of Vrata, Niyama, Svādhyāya, Dama, Satya, Brahmacarya, and Service (व्रत-नियम-स्वाध्याय-दम-सत्य-ब्रह्मचर्य-शुश्रूषा-फलप्रश्नः)
प्रत्यक्षदर्शी सर्वस्य पित्रा पृष्टो महात्मना । सतां वार्ता पितुर्मध्ये महर्षीणां न्यवेदयत्,अपने महात्मा पिताके इस प्रकार पूछनेपर परलोककी सब बातोंको प्रत्यक्ष देखनेवाला नाचिकेत महर्षियोंके बीचमें पितासे वहाँका सब वृत्तान्त निवेदन करने लगा--
เมื่อบิดาผู้มีจิตยิ่งใหญ่ถามดังนั้น นาจิเกตผู้ได้เห็นเรื่องราวแห่งปรโลกด้วยตนเอง ก็เริ่มกราบทูลบิดา ท่ามกลางหมู่มหาฤๅษี เล่าความเป็นไปทั้งหมด ณ ที่นั้น
भीष्म उवाच