Phala of Vrata, Niyama, Svādhyāya, Dama, Satya, Brahmacarya, and Service (व्रत-नियम-स्वाध्याय-दम-सत्य-ब्रह्मचर्य-शुश्रूषा-फलप्रश्नः)
अपि पुत्र जिता लोका: शुभास्ते स्वेन कर्मणा | दिष्ट्या चासि पुन: प्राप्तो न हि ते मानुषं वपु:,बेटा! क्या तुमने अपने कर्मसे शुभ लोकोंपर विजय पायी है? मेरे सौभाग्यसे ही तुम पुनः यहाँ चले आये हो। तुम्हारा यह शरीर मनुष्योंका-सा नहीं है--दिव्य भावको प्राप्त हो गया है”
ลูกเอ๋ย! ด้วยกรรมของตน เจ้าได้พิชิตโลกอันเป็นมงคลแล้วหรือ? ด้วยบุญวาสนาของข้า เจ้าจึงกลับมาถึงที่นี่อีกครั้ง กายของเจ้านี้มิใช่กายมนุษย์ดุจเดิม—ประหนึ่งได้บรรลุภาวะทิพย์แล้ว
भीष्म उवाच