तीर्थवंशोपदेशः
Tīrtha-vaṃśa Upadeśa: Instruction on the Fruits of Sacred Waters
केशकीटावपतित क्षुत॑ श्वभिरवेक्षितम् रुदितं चावधूतं च त॑ भागं रक्षसां विदु:,जिसमें केश या कीड़े पड़ गये हों, जो छींकसे दूषित हो गया हो, जिसपर कुत्तोंकी दृष्टि पड़ गयी हो तथा जो रोकर और तिरस्कारपूर्वक दिया गया हो, वह अन्न भी राक्षसोंका ही भाग माना गया है
ภีษมะกล่าวว่า “อาหารที่มีเส้นผมหรือแมลงตกลงไป อาหารที่ถูกทำให้มัวหมองด้วยการจาม อาหารที่สุนัขเหลือบมอง และอาหารที่ให้ไปทั้งน้ำตาหรือด้วยความดูหมิ่น—ส่วนเช่นนั้นย่อมรู้กันว่าเป็นของรากษส”
भीष्म उवाच