Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
शौचार्थ यो नदीं चक्रे दुर्गमां बहुभिर्जलै: । यां तां पुण्यतमां लोके कौशिकीति विदुर्जना:,विश्वामित्र ऋषि वे ही हैं, जिन्होंने महाभाग महर्षि वसिष्ठका उनके प्यारे पुत्रोंसे सदाके लिये वियोग करा दिया; जो पहले क्षत्रियकुलमें उत्पन्न होकर भी तपस्याके बलसे ब्राह्मण बन गये; जिन्होंने अपने शौच-स्नानकी सुविधाके लिये अगाध जलसे भरी हुई उस दुर्गम नदीका निर्माण किया, जिसे लोकमें सब मनुष्य अत्यन्त पुण्यमयी कौशिकी नदीके नामसे जानते हैं
śaucārthaṃ yo nadīṃ cakre durgamāṃ bahubhir jalaiḥ | yāṃ tāṃ puṇyatamāṃ loke kauśikīti vidur janāḥ ||
เพื่อความบริสุทธิ์—เพื่อการอาบน้ำและชำระกาย—ท่านได้บันดาลให้เกิดแม่น้ำที่ข้ามได้ยากและเปี่ยมด้วยสายน้ำมากมาย. แม่น้ำนั้นเองเป็นที่รู้กันในโลกว่าเป็นสายน้ำชำระบาปยิ่งที่สุด และชนทั้งหลายเรียกมันว่า ‘เกาศิกี’.
कण्व उवाच