Āstīka Stops the Sarpa-satra; Royal Closure and Protective Phalaśruti (आस्तीकः सर्पसत्रनिवर्तनम्)
उदगाता ब्राह्मणो वृद्धो विद्वान् कौत्सो5थ जैमिनि: । ब्रह्माभवच्छार्जरवो<5थाध्वर्युश्नापि पिड़ल:,उग्रश्रवाजीने कहा--शौनकजी! मैं आपको उन मनीषी महात्माओंके नाम बता रहा हूँ, जो उस समय राजा जनमेजयके ऋत्विज् और सदस्य थे। उस यज्ञमें वेद-वेत्ताओंमें श्रेष्ठ ब्राह्मण चण्डभार्गव होता थे। उनका जन्म च्यवन मुनिके वंशमें हुआ था। वे उस समयके विख्यात कर्मकाण्डी थे। वृद्ध एवं विद्वान ब्राह्मण कौत्स उदगाता, जैमिनि ब्रह्मा तथा शार्जरव और पिंगल अध्वर्यु थे
udagātā brāhmaṇo vṛddho vidvān kautso ’tha jaiminiḥ | brahmābhavac chārjaravo ’thādhvaryuś cāpi piṅgalaḥ ||
ฝ่ายอุทคาตฤ (udgātṛ) คือพราหมณ์เกาตสะ ผู้ชราและทรงปัญญา; ไชมินิเป็นพราหมณ์พรหมา (brahmā) ผู้กำกับพิธี; และศารชรวะกับปิงคละทำหน้าที่อัธวรยุ (adhvaryu) ผู้ประกอบกรรมพิธี
शौनक उवाच