परिक्षिद्वृत्तान्तप्रश्नः
Inquiry into Parīkṣit’s Conduct and the Beginnings of His Downfall
तस्य मे दु:खमुत्पन्नं दृष्टवा युष्मानधोमुखान् । कृच्छुमापदमापन्नान् प्रियं कि करवाणि व:,“आपको इस प्रकार नीचे मुँह किये लटकते देख मेरे मनमें बड़ा दुःख हो रहा है। आपलोग बड़ी कठिन विपत्तिमें पड़े हैं। मैं आपलोगोंका कौन प्रिय कार्य करूँ? आपलोग मेरी इस तपस्याके चौथे, तीसरे अथवा आधे भागके द्वारा भी इस विपत्तिसे बचाये जा सकें तो शीघ्र बतलावें
tasya me duḥkham utpannaṃ dṛṣṭvā yuṣmān adhomukhān | kṛcchram āpadam āpannān priyaṃ kiṃ karavāṇi vaḥ ||
ทักษกะกล่าวว่า “เมื่อเห็นพวกท่านห้อยอยู่โดยหันหน้าลงเช่นนี้ ใจข้าพเจ้าเต็มไปด้วยความโศกเศร้า พวกท่านตกอยู่ในเคราะห์ร้ายอันหนักหนา ข้าพเจ้าจะทำการเกื้อกูลสิ่งใดให้พวกท่านได้บ้าง?”
तक्षक उवाच