Śārṅgakānāṃ Avināśaḥ (Why the Śārṅga Birds Were Spared) | शार्ङ्गकानामविनाशः
तेषां ददौ हृषीकेशो जन्यार्थे धनमुत्तमम् | हरणं वै सुभद्राया ज्ञातिदेयं महायशा:,महायशस्वी भगवान् श्रीकृष्णने वधू तथा वरपक्षके लोगोंके लिये उत्तम धन अर्पित किया। वरके कुट॒म्बीजनोंको देनेयोग्य दहेज पहले नहीं दिया गया था, उसीकी पूर्ति उन्होंने इस समय की
มหายศแห่งหฤษีเกศทรงประทานทรัพย์อันประเสริฐแก่พวกเขาเพื่อประโยชน์แก่หมู่ชน และในคราวสุภัทราถูกพาไปนั้น ของกำนัลที่พึงมอบแก่ญาติวงศ์ซึ่งยังขาดอยู่ พระองค์ก็ทรงเติมให้ครบถ้วน
वैशम्पायन उवाच