धृष्टद्युम्नेन समागतक्षत्रियगणगणना
Dhṛṣṭadyumna’s Enumeration of Assembled Kṣatriyas
दृष्टवा स पुनरेवर्षिन्नदीं हैमवर्ती तदा । चण्डग्राहवतीं भीमां तस्या: स्रोतस्यपातयत्,(इस तरह घूमते-घूमते) महर्षिने पुन: हिमालय पर्वतसे निकली हुई एक भयंकर नदीको देखा, जिसमें बड़े प्रचण्ड ग्राह रहते थे। उन्होंने फिर उसीकी प्रखर धारामें अपने-आपको डाल दिया
เมื่อเร่ร่อนอยู่นั้น ฤๅษีได้เห็นอีกครั้งหนึ่งแม่น้ำอันน่าสะพรึงซึ่งไหลลงมาจากหิมวัต เต็มไปด้วยจระเข้ดุร้าย แล้วเขาก็ทิ้งกายลงสู่กระแสน้ำอันเชี่ยวกรากของนาง
गन्धर्व उवाच