और्वोपाख्यानम्
Aurva Episode: Restoration of Sight and Restraint of World-Destructive Anger
भुक्तो वाप्यथवाभुक्तो रात्रावहनि खेचर । न कालनियमो हास्ति गड्ढां प्राप्प सरिद्वराम्,आकाशचारी गन्धर्व! सरिताओंमें श्रेष्ठ गंगाजीके तटपर आनेके लिये यह नियम नहीं है कि यहाँ कोई खाकर आये या बिना खाये, रातमें आये या दिनमें। इसी प्रकार काल आदिका भी कोई नियम नहीं है
โอ้คันธรรพผู้เหินเวหา! การมาถึงฝั่งพระคงคานั้นหาได้มีข้อกำหนดไม่ว่าใครจะมากินแล้วหรือยังมิได้กิน จะมาในราตรีหรือกลางวัน; แม้เรื่องกาลเวลาก็มิใช่ข้อผูกมัด ณ ที่นี้
अजुन उवाच