Ādi Parva, Adhyāya 146 — Brāhmaṇī’s counsel on grief, duty, and protection of children
जिप्राणो5स्य वसागन्ध॑ सर्पिर्जतुविमिश्रितम् । कृतं हि व्यक्तमाग्नेयमिदं वेश्म परंतप,'शत्रुओंको संताप देनेवाले भीमसेन! मुझे इस घरकी दीवारोंसे घी और लाह मिली हुई चर्बीकी गन्ध आ रही है। अतः स्पष्ट जान पड़ता है कि इस घरका निर्माण अग्निदीपक पदार्थोंसे ही हुआ है
“ภีมเสนผู้เผาผลาญศัตรูเอ๋ย! เราได้กลิ่นไขมันที่คลุกด้วยเนยใสและรัก (ยางรัก) จากเรือนนี้; จึงประจักษ์ว่าเรือนนี้สร้างด้วยสิ่งที่ยิ่งเร้าไฟให้ลุกโชน”
वैशम्पायन उवाच