Ādi Parva, Adhyāya 115 — Mādri’s request; invocation of the Aśvins; birth and naming of the Pāṇḍavas
द्विवर्षसम्भृता कुक्षौ तामुत्स्रष्ठं प्रचक्रमे । अथ दड्वैपायनो ज्ञात्वा त्वरित: समुपागमत्,उसने दो वर्षोतक उसे पेटमें धारण किया था, तो भी उसने उसे इतना कड़ा देखकर फेंक देनेका विचार किया। इधर यह बात महर्षि व्यासको मालूम हुई। तब वे बड़ी उतावलीके साथ वहाँ आये
แม้นางจะอุ้มครรภ์มาสองปี ครั้นเห็นว่ามันแข็งนักก็คิดจะทอดทิ้งเสีย ครั้นมหาฤๅษีวยาสทราบเรื่องนั้น ก็รีบรุดมาถึงที่นั่นโดยพลัน
वैशम्पायन उवाच