अर्जुनस्य रथाश्वमोचनं कृष्णस्याश्वसेवा च
Arjuna’s Horses Freed; Krishna’s Equine Service
पुरुमित्रो जयो भोज: काम्बोजश्च सुदक्षिण: । सत्यव्रतो महाबाहुर्विकर्णो दुर्मुखश्च॒ ह,“मैं, सूर्यपुत्र कर्ण, चित्रसेन, विविंशति, भूरिश्रवा, शल, शल्य, दुर्धर्ष वीर वृषसेन, पुरुमित्र, जय, भोज, काम्बोजराज सुदक्षिण, सत्यव्रत, महाबाहु विकर्ण, दुर्मुख, दुःशासन, सुबाहु, अस्त्र-शस्त्रधारी कलिंगराज, अवन्तीके दोनों राजकुमार विन्द और अनुविन्द, द्रोण, अश्वत्थामा और शकुनि--ये तथा और भी बहुत-से नरेश जो विभिन्न देशोंके अधिपति हैं, अपनी सेनाके साथ तुम्हारी रक्षाके लिये चलेंगे। अतः तुम्हारी मानसिक चिन्ता दूर हो जानी चाहिये
purumitro jayo bhojaḥ kāmbojaś ca sudakṣiṇaḥ | satyavrato mahābāhur vikarṇo durmukhaś ca ||
పురుమిత్రుడు, జయుడు, భోజుడు, కాంబోజరాజు సుదక్షిణుడు, సత్యవ్రతుడు, మహాబాహువు వికర్ణుడు, దుర్ముఖుడును (నీ రక్షణార్థం) ముందుకు కదులుతారు.
संजय उवाच