अभिमन्यु-परिवेष्टनम्
Encirclement and Counterassault of Abhimanyu
संशुष्कास्याश्षलन्नेत्रा: प्रस्विन्ना रोमहर्षिण: । पलायनकृतोत्साहा निरुत्साहा द्विषज्जये,जैसे कार्तिकेयने असुरोंकी सेनाको नष्ट-भ्रष्ट कर दिया था, उसी प्रकार एकमात्र सुभद्राकुमार अभिमन्युने अपने तीखे बाणोंद्वारा समस्त कौरव-सेनाको अत्यन्त छिलन्न-भिन्न कर डाला है; यह देखकर आपके पुत्र और सैनिक भयभीत हो दसों दिशाओंकी ओर देखने लगे। उनके मुख सूख गये थे, नेत्र चंचल हो उठे थे, सारे अंगोंमें पसीना हो आया था और उनके रोंगटे खड़े हो गये थे। अब वे भागनेमें उत्साह दिखाने लगे। शत्रुओंको जीतनेके लिये उनके मनमें तनिक भी उत्साह नहीं रह गया था
saṃśuṣkāsyāś calannetrāḥ prasvinnā romaharṣiṇaḥ | palāyanakṛtotsāhā nirutsāhā dviṣajjaye ||
సంజయుడు పలికెను—వారి నోళ్లు ఎండిపోయెను, కన్నులు తడబడెను; వారు చెమటతో తడిసిపోయి రోమాంచముతో వణికిరి. వారి ఉత్సాహము పలాయనానికే కేంద్రీకృతమై, శత్రుజయమునకు వారు పూర్తిగా నిరుత్సాహులయ్యిరి.
संजय उवाच