Droṇavadha-saṃniveśaḥ — The Convergence Toward Droṇa’s Fall
Book 7, Chapter 164
राजा राज्ञा हि योद्धव्यो नाराज्ञा युद्धमिष्यते । तत्र त्वं गच्छ कौन्तेय हस्त्यश्वरथसंवृत:,“क्योंकि राजाको राजाके ही साथ युद्ध करना चाहिये। जो राजा नहीं है, उसके साथ उसका युद्ध अभीष्ट नहीं है। अतः कुन्तीनन्दन! तुम हाथी, घोड़े और रथोंकी सेनासे घिरे रहकर वहीं जाओ
రాజు రాజుతోనే యుద్ధం చేయవలెను; రాజు కానివానితో యుద్ధం ఇష్టమైనది కాదు. కాబట్టి కౌంతేయా, ఏనుగులు-గుర్రాలు-రథాలతో చుట్టుముట్టబడి అక్కడికే వెళ్ళు.
संजय उवाच