अजिशीर्षे प्रातःसंध्यायां संग्रामवर्णनम् / Dawn-Transition Battle at Ajiśīrṣa
Chapter 161
एते हि सोमका विप्र पञ्चालाश्न यशस्विन: । मम सैन्येषु संक्रुद्धा विचरन्ति दवाग्निवत्,विप्रवर! वे यशस्वी पांचाल और सोमक क्रोधमें भरकर दावानलके समान मेरी सेनाओंमें विचर रहे हैं। इन्हींके साथ केकय भी हैं। महाबाहो! नरश्रेष्ठ! वे किरीटधारी अर्जुनसे सुरक्षित हो मेरी सेनाका सर्वनगाश न कर डालें। अतः पहले ही उन्हें रोको
ete hi somakā vipra pañcālāś ca yaśasvinaḥ | mama sainyeṣu saṅkruddhā vicaranti davāgnivat ||
దుర్యోధనుడు అన్నాడు—ఓ బ్రాహ్మణా! ఈ యశస్వులైన సోమకులు, పాంచాలులు కోపంతో ఉవ్వెత్తున లేచి అడవిదావానలంలా నా సేనల్లో సంచరిస్తున్నారు. వారి దాడి ఆపుకోలేక నా సైన్యాన్ని మింగేస్తోంది; కాబట్టి వెంటనే వారిని అడ్డుకోవాలి.
दुर्योधन उवाच