अजिशीर्षे प्रातःसंध्यायां संग्रामवर्णनम् / Dawn-Transition Battle at Ajiśīrṣa
Chapter 161
विकत्थमान: शौर्येण सर्वलोकथनुर्थरम् । दर्पोत्सेधगृहीतो5द्य न कज्चिद् गणयन् मृथे,अश्वत्थामाने कहा--दुर्बुद्धि! नराधम! मेरे मामा सम्पूर्ण जगतके श्रेष्ठ धनुर्धर एवं शूरवीर हैं। ये अर्जुनके सच्चे गुणोंका बखान कर रहे थे, तो भी तू द्वेषवश अपनी शूरताकी डींग हाँकता हुआ और घमण्डमें आकर आज युद्धमें किसीको कुछ न समझता हुआ जो इन्हें फटकार रहा है, उसका क्या कारण है?
vikatthamānaḥ śauryeṇa sarvalokadhanurdharam | darpotsedhagṛhīto 'dya na kaścid gaṇayan mṛdhe ||
తన శౌర్యాన్ని గొప్పగా చెప్పుకుంటూ, ఈ రోజు అహంకారపు ఉప్పెనలో చిక్కి, యుద్ధరంగంలో ఎవ్వరినీ లెక్కచేయకుండా, సమస్త లోకాలలో ప్రసిద్ధుడైన ఆ శ్రేష్ఠ ధనుర్ధరుణ్ని గద్దిస్తున్నాడు।
संजय उवाच