धृष्टद्युम्नस्य द्रोणाभिमुख्यं तथा सात्यकि-कर्ण-समागमः
Dhṛṣṭadyumna’s advance toward Droṇa and the Sātyaki–Karṇa confrontation
असंक्रुद्धमना वाच: स्मारयन्निव भारत | उवाच पाण्डुतनय: साक्षेपमिव फाल्गुन:,भरतनन्दन! पाण्डुपुत्र अर्जुनके मनमें तनिक भी क्रोध नहीं हुआ। उन्होंने मानो पुरानी बातें याद दिलाते हुए, कौरवोंपर आक्षेप करते हुए-से कहा--
asaṁkruddhamanā vācaḥ smārayann iva bhārata | uvāca pāṇḍutanayaḥ sākṣepam iva phālgunaḥ ||
భారతా! పాండుతనయుడు ఫాల్గునుడు (అర్జునుడు) మనస్సులో క్రోధం లేకుండానే, పూర్వ విషయాలను గుర్తుచేస్తున్నట్లుగా, కౌరవులపై ఆక్షేపం చేస్తున్నట్లుగా పలికాడు।
संजय उवाच