कच-देवयानी संवादः
Kaca–Devayānī Dialogue and the Curse on Vidyā
कण्वं हि पितरं मन्ये पितरं स्वमजानती । इति ते कथितं राजन् यथावृत्तं श्रुतं मया,शकुन्तला कहती है--राजन्! उन महर्षिके पूछनेपर पिता कण्वने मेरे जन्मका यह वृत्तान्त उन्हें बताया था। इस तरह आप मुझे कण्वकी ही पुत्री समझिये। मैं अपने जन्मदाता पिताको तो जानती नहीं, कण्वको ही पिता मानती हूँ। महाराज! इस प्रकार जो वृत्तान्त मैंने सुन रखा था, वह सब आपको बता दिया
kaṇvaṃ hi pitaraṃ manye pitaraṃ svam ajānatī | iti te kathitaṃ rājan yathāvṛttaṃ śrutaṃ mayā |
శకుంతలా పలికెను—రాజా! నా జన్మదాత తండ్రిని నేను ఎరుగను; అందుచేత కణ్వునే తండ్రిగా భావించుచున్నాను. మహారాజా! నేను విన్నది యథావృత్తంగా మీకు చెప్పితిని.
कण्व उवाच