Hiḍimba’s Approach and Hiḍimbā’s Warning to Bhīmasena (हिडिम्बागमनम् / हिडिम्बा-भयवचनम्)
फलार्थो5यं समारम्भो लोके पुंसां विपश्चिताम् । वहेदमित्र॑ स्कन्धेन यावत् कालस्य पर्यय:,“लोकमें विद्वान् पुरुषोंका यह सारा आयोजन ही अभीष्ट फलकी सिद्धिके लिये होता है। जबतक समय बदलकर अपने अनुकूल न हो जाय, तबतक शत्रुको कंधेपर बिठाकर ढोना पड़े, तो ढोये भी
లోకంలో వివేకులైన పురుషుల సమస్త ప్రయత్నమూ ఇష్టఫలసిద్ధికే. కాలం మారి అనుకూలించేవరకు, శత్రువును కూడా భుజంపై మోసుకోవలసి వచ్చినా మోసుకోవాలి.
वैशम्पायन उवाच