Ādi-parva Adhyāya 116 — Pāṇḍu’s Transgression of the Curse and Mādrī’s Final Charge
उक्ता महर्षिणा तेन व्यासेनामिततेजसा । कथं त्विदानीं भगवन् कन्यां त्व॑ं तु ब्रवीषि मे,अनघ! इस समय आपने वैश्यापुत्र युयुत्सु तथा सौ पुत्रोंके अतिरिक्त एक कन्याकी भी चर्चा की है। अमिततेजस्वी महर्षि व्यासने गान्धारराजकुमारीको सौ पुत्र होनेका ही वरदान दिया था। भगवन्! फिर आप मुझसे यह कैसे कहते हैं कि एक कन्या भी हुई
Janamejaya uvāca | uktā maharṣiṇā tena vyāsenāmitatejasā | kathaṃ tv idānīṃ bhagavan kanyāṃ tvaṃ tu bravīṣi me, anagha |
జనమేజయుడు అన్నాడు— “భగవన్, అనఘా! ముందుగా అమితతేజస్సు మహర్షి వ్యాసుడు గాంధారరాజ కుమార్తెకు శతపుత్రత్వమే ప్రకటించాడు. మరి ఇప్పుడు మీరు కుమార్తె జననం గురించి నాకు ఎలా చెబుతున్నారు?”
जनमेजय उवाच