परिव्राजक-आचारः (Conduct of the Wandering Renunciant) — Mahābhārata, Śānti-parva 269
समाप्तं त्याग इत्येव सर्ववेदेषु निष्ठितम् । संतोष इत्यनुगतमपवर्गे प्रतेष्ठितम्,सब कुछ त्याग देनेपर ही उस ब्रह्मकी प्राप्ति होती है। यही बात सम्पूर्ण वेदोंमें निश्चित की गयी है। वह अपने आनन्दस्वरूपसे सबमें अनुगत तथा अपवर्ग (मोक्ष) में प्रतिष्ठित है
samāptaṁ tyāga ity eva sarvavedeṣu niṣṭhitam | santoṣa ity anugatam apavarge pratiṣṭhitam ||
समाप्तं त्याग इत्येव सर्ववेदेषु निष्ठितम्। सन्तोष इत्यनुगतमपवर्गे प्रतिष्ठितम्॥
कपिल उवाच