Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
अथ तत्र विरागी स गच्छति त्वथ संशयम् । परमव्ययमिच्छन् स तमेवाविशते पुन:,यदि उन लोकोंकी उत्कृष्टतामें संदेह हो जाय और इस कारण वह जापक वहाँसे विरक्त हो जाय तो वह उत्कृष्ट एवं अविनाशी मोक्षकी इच्छा रखता हुआ फिर उसी परमेष्ठी ब्रह्मामें प्रवेश कर जाता है
अथ तत्र विरागी स गच्छति त्वथ संशयम् । परमव्ययमिच्छन् स तमेवाविशते पुनः ॥
विरूप उवाच