Adhyāya 199: Karma–Jñāna Causality and the Nirguṇa Brahman
Manu’s Instruction
एवं सोमे तथा वायौ भूम्याकाशशरीरग: । सरागस्तत्र वसति गुणांस्तेषां समाचरन्,इसी प्रकार संहिताका जप करनेवाला पुरुष रागयुक्त होनेपर चन्द्रलोक, वायुलोक, भूमिलोक तथा अन्तरिक्षलोकके योग्य शरीर धारण करके वहाँ निवास करता है और उन लोकोंमें रहनेवाले पुरुषोंके गुणोंका आचरण करता रहता है
evaṃ some tathā vāyau bhūmyākāśaśarīragaḥ | sarāgas tatra vasati guṇāṃs teṣāṃ samācaran ||
एवं सोमे तथा वायौ भूम्याकाशशरीरगः । सरागस्तत्र वसति गुणांस्तेषां समाचरन् ॥
विरूप उवाच