Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
यथा यथा हि पुरुषो नित्यं शास्त्रमवेक्षते । तथा तथा विजानाति विज्ञानमथ रोचते,पुरुष प्रतिदिन जैसे-जैसे शास्त्रका स्वाध्याय करता है वैसे-वैसे उसका ज्ञान बढ़ता जाता है फिर तो विशेष ज्ञान प्राप्त करनेमें ही उसकी रुचि हो जाती है
yathā yathā hi puruṣo nityaṁ śāstram avekṣate | tathā tathā vijānāti vijñānam atha rocate ||
यथा यथा हि पुरुषो नित्यं शास्त्रमवेक्षते । तथा तथा विजानाति विज्ञानमथ रोचते ॥
भीष्म उवाच