Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
दुःखादान इह होष स्यात् तु पश्चात् क्षयोपम: । अभिगम्यमतीनां हि सर्वासामेव निश्चय:,आपत्तिके समय भी यदि प्रजाको दुःख देकर धन वसूल किया जाता है तो पीछे वह राजाके लिये विनाशके तुल्य सिद्ध होता है। आश्रय लेने योग्य जितनी बुद्धियाँ हैं, उन सबका यही निश्चय है
duḥkhādāna iha hoṣa syāt tu paścāt kṣayopamaḥ | abhigamyamatīnāṃ hi sarvāsām eva niścayaḥ ||
दुःखादान इह होष स्यात् तु पश्चात् क्षयोपमः । अभिगम्यमतीनां हि सर्वासामेव निश्चयः ॥
भीष्म उवाच