ध्वजवर्णनम् | Dhvaja-varṇanam
Description of War Standards
जित्वा रिपुगणांश्वैव पारयत्वर्जुनो व्रतम् । श्वो5हत्वा सिन्धुराजं वै धूमकेतु प्रवेक्ष्यति,अर्जुन शत्रुओंको जीतकर अपना व्रत पूरा करें। यदि वे कल सिंधुराजको न मार सके तो अग्निमें प्रवेश कर जायँगे। कुन्तीकुमार धनंजय अपनी बात झूठी नहीं कर सकते। यदि अर्जुन मर गये तो धर्मपुत्र युधिष्ठिर कैसे राजा होंगे?
jitvā ripu-gaṇāṁś caiva pārayatv arjuno vratam | śvo hatvā sindhu-rājaṁ vai dhūma-ketuṁ pravekṣyati ||
जित्वा रिपुगणांश्चैव पारयत्वर्जुनो व्रतम्। श्वोऽहत्वा सिन्धुराजं वै धूमकेतुं प्रवेक्ष्यति॥
संजय उवाच