Droṇa-parva Adhyāya 25 — Bhīma’s Disruption of Elephant Formations and Bhagadatta’s Shock Advance
इदं घोरमिदं चित्रमिदं रौद्रमिति प्रभो । तत्र युद्धान्यदृश्यन्त प्रततानि बहूनि च,प्रभो! वहाँ भिन्न-भिन्न दलोंमें बहुत-से विस्तृत युद्ध दृष्टिगोचर हो रहे थे, जिन्हें देखकर दर्शक कहते थे “यह घोर युद्ध हो रहा है, यह विचित्र संग्राम दिखायी देता है और यह अत्यन्त भयंकर मारकाट हो रही है!
idaṁ ghoram idaṁ citram idaṁ raudram iti prabho | tatra yuddhāny adṛśyanta pratatāni bahūni ca ||
सञ्जय उवाच— “इदं घोरम्, इदं चित्रम्, इदं रौद्रम्” इति प्रभो, तत्र बहूनि प्रततानि युद्धानि सर्वतः प्रादृश्यन्त; तानि दृष्ट्वा जनाः पुनःपुनरिदं वाक्यमुदाहरन्॥
संजय उवाच