दीप्ताड़दो दीप्तकिरीटमाली बद्धस्रगुष्णीषनिबद्धखड्ग: । गदी भुशुण्डी मुसली हली च शरासनी वारणतुल्यवर्ष्मा,उसकी भुजाओंमें बाजूबंद चमक रहे थे। मस्तकपर दीप्तिमान् मुकुट प्रकाशित हो रहा था। उसने हार पहन रखे थे। उसकी पगड़ीमें तलवार बँधी हुई थी। उसका शरीर हाथीके समान था तथा वह गदा, भुशुण्डी, मुसल, हल और धनुष आदि अस्त्र-शस्त्रोंसे सम्पन्न था
sañjaya uvāca |
dīptāṅgado dīptakirīṭamālī baddhasrag uṣṇīṣanibaddhakhaḍgaḥ |
gadī bhuśuṇḍī musalī halī ca śarāsanī vāraṇatulyavarṣmā ||
सञ्जय उवाच—दीप्ताङ्गदो दीप्तकिरीटमाली बद्धस्रगुष्णीषनिबद्धखड्गः। गदी भुशुण्डी मुसली हली च शरासनी वारणतुल्यवर्ष्मा॥
संजय उवाच