त्वां पुरस्कृत्य सगणं वयं योत्स्यामहे परान् । न हि वैरान्तमनस: स्थास्यन्ति मम सैनिका:,'राक्षसराज! सैनिकोंसहित तुम्हें आगे रखकर हमलोग भी शत्रुओंके साथ युद्ध करेंगे; क्योंकि जिनका मन वैरका अन्त करनेमें लगा हुआ है, वे मेरे सैनिक चुपचाप खड़े नहीं रहेंगे!
tvāṁ puraskṛtya sagaṇaṁ vayaṁ yotsyāmahe parān | na hi vairāntamanasaḥ sthāsyanti mama sainikāḥ ||
त्वां पुरस्कृत्य सगणं वयं योत्स्यामहे परान् । न हि वैरान्तमनसः स्थास्यन्ति मम सैनिकाः ॥
संजय उवाच