औपनआक्ाा बछ। अर: षट्सप्तत्याधेकशततमो< ध्याय: अलायुथका युद्धस्थलमें प्रवेश तथा उसके स्वरूप और रथ आदिका वर्णन संजय उवाच तस्मिंस्तथा वर्तमाने कर्णराक्षसयोर्मथे अलायुधो राक्षसेन्द्रो वीर्यवानभ्यवर्तत,संजय कहते हैं--राजन्! इस प्रकार कर्ण और घटोत्कचका वह युद्ध चल ही रहा था कि पराक्रमी राक्षसराज अलायुध वहाँ उपस्थित हुआ
sañjaya uvāca | tasmiṃs tathā vartamāne karṇa-rākṣasayor mathe alāyudho rākṣasendro vīryavān abhyavartata |
सञ्जय उवाच—राजन्, तस्मिंस्तथा वर्तमाने कर्णराक्षसयोर्मथे वीर्यवान् राक्षसेन्द्रः अलायुधो रणभूमिं प्रविश्य तत्राभ्यवर्तत।
संजय उवाच