दुर्योधनस्य कर्णप्रार्थना — कृपकर्णसंवादः
Duryodhana’s Appeal to Karna — The Kripa–Karna Dialogue
राधेयो भीममानर्च्छद् युद्धाय भरतर्षभ | यथा नागो वने नागं मत्तो मत्तमभिद्रवन्,संजय कहते हैं--भरतश्रेष्ठ महाराज! इस प्रकार रोमांचकारी संग्राम छिड़ जानेपर जब सारी सेनाएँ सब ओरसे पीड़ित और व्याकुल हो गयीं तब राधानन्दन कर्ण युद्धके लिये पुनः भीमसेनके सामने आया। ठीक उसी तरह, जैसे वनमें एक मतवाला हाथी दूसरे मदोन्मत्त हाथीपर आक्रमण करता है
sañjaya uvāca | rādheyo bhīmam ānarcchad yuddhāya bharatarṣabha | yathā nāgo vane nāgaṃ matto mattam abhidravan ||
राधेयो भीममानर्च्छद् युद्धाय भरतर्षभ। यथा नागो वने नागं मत्तो मत्तमभिद्रवन्॥
संजय उवाच