विदुरस्य कृष्णं प्रति शमोपदेशः
Vidura’s Counsel to Krishna on the Limits of Peace
अकम्माद् द्वेष्टि वै राजन् जन्मप्रभृति पाण्डवान् | प्रियानुवर्तिनो भ्रातृन् सर्व: समुदितान् गुणै:ः,“राजन! पाण्डव तुम्हारे भाई ही हैं, वे अपने प्रेमियोंका साथ देनेवाले और समस्त सदगुणोंसे सम्पन्न हैं, तथापि तुम जन्मसे ही उनके साथ अकारण ही द्वेष करते हो
ହେ ରାଜନ! ପାଣ୍ଡବମାନେ ତୁମର ଭାଇ—ସେମାନେ ପ୍ରିୟଜନଙ୍କ ପକ୍ଷ ଅନୁସରଣକାରୀ ଏବଂ ସମସ୍ତ ଗୁଣରେ ସମୃଦ୍ଧ; ତଥାପି ତୁମେ ଜନ୍ମରୁ ହିଁ କାରଣ ବିନା ସେମାନଙ୍କୁ ଦ୍ୱେଷ କରୁଛ।
वैशम्पायन उवाच