Pāṇḍava-senā-niryāṇa and Vyūha-vibhāga (पाण्डवसेनानिर्याण तथा व्यूहविभाग)
उलूकस्य तु तद् वाक््यं पापं दारुणमीरितम् | श्र॒ुत्वा विचुक्षुभे पार्थो ललाटं चाप्यमार्जयत्,उलूकके कहे हुए उस पापपूर्ण दारुण वचनको सुनकर कुन्तीपुत्र अर्जुनको बड़ा क्षोभ हुआ। उन्होंने हाथसे ललाटका पसीना पोंछा
ulūkasya tu tad vākyaṃ pāpaṃ dāruṇam īritam | śrutvā vicukṣubhe pārtho lalāṭaṃ cāpy amārjayat ||
ଉଲୂକ କହିଥିବା ସେହି ପାପପୂର୍ଣ୍ଣ ଓ ଦାରୁଣ ବାକ୍ୟ ଶୁଣି କୁନ୍ତୀପୁତ୍ର ଅର୍ଜୁନ ଗଭୀର ଭାବେ କ୍ଷୁବ୍ଧ ହେଲେ; ସେ ହାତରେ ଲଲାଟର ଘାମ ପୁଛିଲେ।
संजय उवाच