वारुणी सभा — Varuṇa’s Divine Assembly
Nārada’s Description
तथा शकुनयस्तस्यां विचित्रा मधुरस्वरा: । अनिर्देश्या वपुष्मन्त: शतशो5थ सहस्रश:,सभाभवनके भीतर विचित्र और मधुर स्वरसे बोलनेवाले सैकड़ों-हजारों पक्षी चहकते रहते हैं। उनके विलक्षण रूप-सौन्दर्यका वर्णन नहीं हो सकता। उनकी आकृति बड़ी सुन्दर है
tathā śakunayas tasyāṃ vicitrā madhurasvarāḥ | anirdeśyā vapuṣmantaḥ śataśo ’tha sahasraśaḥ ||
ତଥା ସେହି ସଭାଭବନ ଭିତରେ ବିଚିତ୍ର ରୂପ ଓ ମଧୁର ସ୍ୱର ଥିବା ଶତଶଃ ସହସ୍ରଶଃ ପକ୍ଷୀମାନେ କଲରବ କରୁଥିଲେ। ସେମାନଙ୍କ ରୂପସୌନ୍ଦର୍ୟ ବର୍ଣ୍ଣନାତୀତ; ସେମାନଙ୍କ ଦେହାକୃତି ଅତ୍ୟନ୍ତ ମନୋହର ଥିଲା।
नारद उवाच