हस्तिनापुरसे उन नरश्रेष्ठ पाण्डवोंके निकलते ही बिना बादलके बिजली गिरने लगी, पृथ्वी काँप उठी। राजन्! बिना पर्व (अमावस्या)-के ही राहुने सूर्यको ग्रस लिया था और नगरको दायें रखकर उल्का गिरी थी ।। प्रत्याहरन्ति क्रव्यादा गृध्रगोमायुवायसा: । देवायतनचैत्येषु प्राकाराट्टालकेषु च,गीध, गीदड़ और कौवे आदि मांसाहारी जन्तु नगरके मन्दिरों, देववृक्षों, चहारदीवारी तथा अट्टालिकाओंपर मांस और हड्डी आदि लाकर गिराने लगे थे
pratyāharanti kravyādā gṛdhragomāyuvāyasāḥ | devāyatanacaityeṣu prākārāṭṭālakeṣu ca ||
ଗିଧ, ଗୋମାୟୁ (ଶିଆଳ) ଓ କାଉଁଆ ଆଦି ମାଂସାହାରୀ ପ୍ରାଣୀମାନେ ମାଂସ ଓ ହାଡ଼ର ଖଣ୍ଡ ଉଠାଇ ଆଣି ନଗରର ଦେବାୟତନ, ଚୈତ୍ୟସ୍ଥାନ, ପ୍ରାକାର ଓ ଅଟ୍ଟାଳିକାମାନଙ୍କ ଉପରେ ପକାଇବାକୁ ଲାଗିଲେ।
विदुर उवाच