धर्मविद्भिः स देवेशो नमस्कार्यः सदाच्युतः धर्म एव सदा हि स्याद् अस्मिन्न् अभ्यर्चिते विभौ //
ଏହା ବ୍ରହ୍ମପୁରାଣର ଏକାବନତମ ଶ୍ଲୋକ; ମୂଳ ସଂସ୍କୃତ ପାଠ ଏଠାରେ ଦିଆଯାଇନାହିଁ।