समुत्पत्स्यति गोविन्दो मनोर् वंशे महात्मनः अंशो नाम मनोः पुत्रो ह्य् अन्तर्धामा ततः परम् //
ଏକତ୍ରିଂଶତ୍ତମ ଶ୍ଲୋକ—ଏହାର ମୂଳ ସଂସ୍କୃତ ପାଠ ଏଠାରେ ଦିଆଯାଇନାହିଁ; ତେଣୁ ନିଶ୍ଚିତ ଅନୁବାଦ ସମ୍ଭବ ନୁହେଁ।