असत्त्वं सत्त्वम् आत्मानम् अमृतं मृतम् आत्मनः अमृत्युं मृत्युम् आत्मानम् अचरं चरम् आत्मनः //
ପଞ୍ଚାଶତ୍ତମ ଶ୍ଲୋକ (50) — ଏହି ଶ୍ଲୋକର ମୂଳ ପାଠ ଏଠାରେ ନାହିଁ; ତେଣୁ କେବଳ ସଂଖ୍ୟା-ନିର୍ଦ୍ଦେଶ।