Duryodhana’s Śaraṇāgati and the Pāṇḍavas’ Resolve
Gandharva Encounter
उमा चैव महाभागा देवाश्व समहर्षय: । पृथ्वी हिलने लगी। उसमें गड़गड़ाहट पैदा हो गयी। सारा जगत् अन्धकारमें मग्न-सा जान पड़ता था। उस समय यह दारुण उत्पात देखकर भगवान् शंकर, महाभागा उमा, देवगण तथा महर्षिगण क्षुब्ध हो उठे ।। ततस्तेषु प्रमूढेषु पर्वताम्बुदसंनिभम्
महाभागा उमा, देवगण आणि महर्षिगणही क्षुब्ध झाले. मग ते सर्व जण विस्मय-मोहात असतानाच पर्वत व मेघसमूहांसारखे (एक दृश्य) प्रकट झाले.
मार्कण्डेय उवाच