Karma-Saṃnyāsa–Karma-Yoga Saṃvāda
Renunciation and the Discipline of Action
सम्बन्ध-- अजुनने जो यह पूछा था कि आप मुझे घोर कर्ममें क्यों लगाते हैं; उसके उत्तरमें ऊपरये कर्मोका त्याग करनेवाले मिथ्याचारीकी निन््दा और कर्मयोगीकी प्रशंसा करके अब उन्हें कर्म करनेके लिये आज्ञा देते हैं-- नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो हाकर्मण: । शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मण:,तू शास्त्रविहित कर्तव्यकर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है* तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी नहीं सिद्ध होगा
niyataṁ kuru karma tvaṁ karma jyāyo hy akarmaṇaḥ | śarīra-yātrāpi ca te na prasiddhyed akarmaṇaḥ ||
तू शास्त्रविहित नियत कर्तव्यकर्म कर; कारण अकर्मापेक्षा कर्म श्रेष्ठ आहे. कर्म न केल्यास तुझा देह-निर्वाहही सिद्ध होणार नाही.
अजुन उवाच