Adhyāya 90: Babhruvāhana’s Reception and the Commencement of Yudhiṣṭhira’s Aśvamedha
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्र धर्मज्ञैर्बहुभिव॒ते | उज्छवृत्तिद्विज: कश्चित् कापोतिरभवत् तदा,कुछ दिनों पहलेकी बात है, धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्रमें, जहाँ बहुत-से धर्मज्ञ महात्मा रहा करते हैं, कोई ब्राह्मण रहते थे। वे उज्छवृत्तिसे अपना जीवन-निर्वाह करते थे। कबूतरके समान अन्नका दाना चुनकर लाते और उसीसे कुटुम्बका पालन करते थे
Nakula uvāca | dharmakṣetre kurukṣetre dharmajñair bahubhir vṛte | ucchavṛttir dvijaḥ kaścit kāpotir abhavat tadā |
नकुल म्हणाला—धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्रात, जिथे अनेक धर्मज्ञ महात्मे वास करीत, तेथे एक ब्राह्मण राहत असे. तो उञ्छवृत्तीने उपजीविका करी; कबुतराप्रमाणे उरलेले धान्यकण वेचून आणी आणि त्या अल्प अन्नावरच कुटुंबाचे पालन करी।
नकुल उवाच