अध्याय ९६: शरभ-प्रादुर्भावः, नृसिंह-दर्पशमनम्, विष्णोः शिवस्तुतिः, फलश्रुति
नमो ऽनन्ताय सूक्ष्माय नमस्ते मृत्युमन्यवे पराय परमेशाय परात्परतराय ते
namo 'nantāya sūkṣmāya namaste mṛtyumanyave parāya parameśāya parātparatarāya te
अनंत व सूक्ष्म स्वरूपा—आपांस नमस्कार। मृत्युला जिंकणाऱ्या मन्यूस—आपांस नमस्कार। परात्पर परमेश्वर, सर्वोच्चाहूनही उच्च—आपांस प्रणाम।
Suta Goswami (narrating a hymn of praise within the Linga Purana’s Shaiva context)