ब्रह्मोवाच यो ऽसौ सर्वगतो देवस् त्रिपुरारिस् त्रिलोचनः उमाप्रियकरो रुद्रश् चन्द्रार्धकृतशेखरः //
आता चौतीसावा अध्याय आरंभतो; 34.1 हे प्रथम श्लोक-स्थान असून अर्थ प्रसंगातून घ्यावा।