एषो<स्त्र॑ विविध॑ वेत्ति त्रैलोक्ये सचराचरे | न चैवान्य: पुमान् वेत्ति न वेत्स्यति कदाचन,ये मूर्तिमान धर्म हैं तथा पराक्रमी पुरुषोंमें श्रेष्ठ हैं। इस जगत्में ये सबसे बढ़कर बुद्धिमान् और तपस्याके परम आश्रय हैं। ये नाना प्रकारके ऐसे अस्त्रोंको जानते हैं, जिन्हें इस चराचर त्रिलोकीमें दूसरा मनुष्य न तो जानता है और न कभी जान सकेगा
arjuna uvāca | eṣo 'stra-vidhaṁ veda trailokye sa-carācare | na caivānyaḥ pumān vetti na vetsyati kadācana ||
അർജുനൻ പറഞ്ഞു—ചരാചരസഹിതമായ ത്രിലോകത്തിലെ നാനാവിധ ആയുധങ്ങൾ ഇദ്ദേഹം അറിയുന്നു. ഇദ്ദേഹത്തെ ഒഴികെ മറ്റൊരു മനുഷ്യനും അവ അറിയുന്നില്ല; ഒരിക്കലും അറിയുകയുമില്ല.
अर्जुन उवाच