Adhyāya 6: Vidura’s Saṃsāra-Upamā
The Allegory of the Well, Time, and Desire
यास्तु ता बहुशो धारा: स्रवन्ति मधुनिस्रवम् । तांस्तु कामरसान् विद्याद् यत्र मज्जन्ति मानवा:,और जो-जो वहाँ मधुमक्खियाँ कही गयी हैं, वे सब कामनाएँ हैं। जो बहुत-सी धाराएँ मधुके झरने झरती रहती हैं, उन्हें कामरस जानना चाहिये, जहाँ सभी मानव डूब जाते हैं
yāstu tā bahuśo dhārāḥ sravanti madhunisravam | tāṁstu kāmarasān vidyād yatra majjanti mānavāḥ ||
പലധാരകളായി തേൻ തുടർച്ചയായി ചോരുന്നതിനെ ‘കാമരസം’ എന്നു അറിയണം—അവിടെയാണ് മനുഷ്യർ മുങ്ങിപ്പോകുന്നത്.
विदुर उवाच