अध्याय ३३७ — ज्ञानमार्ग-वैविध्यप्रश्नः तथा व्यासस्य नारायणोद्भवकथा
Systems of Knowledge and Vyāsa’s Nārāyaṇa-Origin
ततः पुनर्वर्षशतं तप्त्वा तात्कालिकं महत्,“तदनन्तर हमने तत्काल पुनः सौ वर्षोंतक बड़ी भारी तपस्या की। उस तपोमय व्रतके पूर्ण होनेपर हमलोगोंको वहाँके शुभलक्षण पुरुषोंका दर्शन हुआ, जो चन्द्रमाके समान गौरवर्ण और सब प्रकारके उत्तम लक्षणोंसे सम्पन्न थे
ഭീഷ്മൻ പറഞ്ഞു—“അതിനു ശേഷം ഞങ്ങൾ ഉടൻ തന്നെ വീണ്ടും നൂറു വർഷം മഹത്തായ തപസ്സു ചെയ്തു.”
भीष्म उवाच