Nārāyaṇasya Guhya-nāmāni Niruktāni (Etymologies of Nārāyaṇa’s Secret Epithets) / नारायणस्य गुह्यनामानि निरुक्तानि
सर्वारम्भपरित्यागी निराशीरन्निष्परिग्रह: । येन सर्व परित्यक्त स विद्वान स च पण्डित:,जो कार्य आरम्भ करनेके सभी संकल्पोंको छोड़ चुका है, जिसके मनमें कोई कामना नहीं है, जो किसी वस्तुका संग्रह नहीं करता तथा जिसने सब कुछ त्याग दिया है, वही विद्वान है और वही पण्डित
എല്ലാ ആരംഭങ്ങളുടെയും ആസക്തി ഉപേക്ഷിച്ചവൻ, ആഗ്രഹരഹിതൻ, സമ്പാദിച്ചു കൂട്ടാത്തവൻ, എല്ലാം പരിത്യജിച്ചവൻ—അവനേ വിദ്വാൻ; അവനേ പണ്ഡിതൻ.
नारद उवाच