Dhaumya’s Counsel on Incognito Conduct in a Royal Household (राजवसतौ आचरण-निति)
वैशम्पायन उवाच एवमुक्तस्ततो राज्ञा धौम्यो5थ द्विजसत्तम: | अकरोद् विधिवत सर्व प्रस्थाने यद् विधीयते,वैशम्पायनजी कहते हैं-जनमेजय! राजा युधिष्ठिरके ऐसा कहनेपर विप्रवर धौम्यजीने यात्राके समय जो आवश्यक शास्त्रविहित कर्तव्य है, वह सब विधिपूर्वक सम्पन्न किया
ໄວສັມປາຍະນະກ່າວວ່າ: «ເມື່ອພະຣາຊາກ່າວດັ່ງນັ້ນແລ້ວ, ທ່ານທໍາຍະ ຜູ້ເປັນພຣາຫມັນຜູ້ປະເສີດ ໄດ້ປະຕິບັດທຸກຢ່າງຕາມພິທີກໍາ ທີ່ຄວນເຮັດໃນຍາມອອກເດີນທາງ, ໃຫ້ສໍາເລັດຢ່າງຖືກຕ້ອງຕາມທໍານຽມ».
वैशम्पायन उवाच