सूर्य–कर्णोपदेशः
Sūrya’s Counsel to Karṇa on Kīrti and the Kuṇḍala
7 जन ] ४! । (/9,|।। #//7+7) ९३४४ ।। प्रतिजग्राह समस्तं स्वागतेन महामना: । सुग्रीवस्य तु शड्काभूत् प्रणिधि: स्यादिति सम ह,महामना श्रीरामने स्वागतपूर्वक उन्हें अपनाया। उस समय सुग्रीवके मनमें यह शंका हुई कि “कहीं यह शत्रुका कोई गुप्तचर न हो”
pratijagrāha samastaṃ svāgatena mahāmanāḥ | sugrīvasya tu śaṅkābhūt praṇidhiḥ syād iti saḥ ||
ພຣະຣາມຜູ້ໃຈກວ້າງໄດ້ຮັບພວກເຂົາທັງໝົດດ້ວຍຖ້ອຍຄຳຕ້ອນຮັບອັນສົມຄວນ. ແຕ່ໃນໃຈຂອງສຸກຣີວະ ກໍເກີດຄວາມສົງໄສວ່າ: «ຫຼືວ່ານີ້ເປັນສາຍລັບຂອງສັດຕູ?»
मार्कण्डेय उवाच