भीष्मस्य दुर्योधनं प्रति कुलहितोपदेशः | Bhīṣma’s Counsel to Duryodhana on Dynastic Welfare
जो किसीके द्वारा अच्छी तरह पालित-पोषित होकर कृतार्थ होते हैं; परंतु उस उपकारका बदला चुकाने-योग्य समय आनेपर जो अस्थिरचित्त पापात्मा पुरुष पूर्वकृत उपकारोंको न देखकर बदल जाते हैं, वे स्वामीके अन्नका अपहरण करनेवाले तथा उपकारी राजाके प्रति अपराधी हैं। उन पापाचारी कृतघ्नोंके लिये न तो यह लोक सुखद होता है न परलोक ही ।। धृतराष्ट्रस्य पुत्राणामर्थे योत्स्यामि ते सुतैः । बलं॑ च शक्ति चास्थाय न वै त्वय्यनृतं वदे,मैं तुमसे झूठ नहीं बोलता। धृतराष्ट्रके पुत्रोंक लिये मैं अपनी शक्ति और बलके अनुसार तुम्हारे पुत्रोंके साथ युद्ध अवश्य करूँगा
dhṛtarāṣṭrasya putrāṇām arthe yotsyāmi te sutaiḥ | balaṃ ca śaktiṃ cāsthāya na vai tvayy anṛtaṃ vade ||
ກັນນະກ່າວວ່າ: “ຜູ້ໃດຖືກອຸປະຖໍາລ້ຽງດູຢ່າງດີ ແລະສໍາເລັດຜົນ; ແຕ່ເມື່ອເວລາຄວນຕອບແທນບຸນຄຸນມາຮອດ ກັບເປັນຄົນບາບໃຈບໍ່ໝັ້ນຄົງ ບໍ່ເບິ່ງບຸນຄຸນເກົ່າແລ້ວຫັນຫຼັງ—ຜູ້ນັ້ນແມ່ນຜູ້ຊິງເອົາອາຫານຂອງນາຍ ແລະເປັນຜູ້ຜິດຕໍ່ພະຣາຊາຜູ້ມີບຸນຄຸນ. ສໍາລັບຄົນອະກະຕັນຍູຜູ້ກະທໍາບາບເຫຼົ່ານັ້ນ ບໍ່ມີຄວາມສຸກໃນໂລກນີ້ ແລະບໍ່ມີຄວາມສຸກໃນໂລກໜ້າ. ເພື່ອປະໂຫຍດແກ່ລູກຊາຍຂອງ ທຣິຕຣາສຕຣະ ຂ້ອຍຈະຮົບກັບລູກຊາຍຂອງເຈົ້າ ໂດຍອາໄສກໍາລັງແລະອໍານາດຂອງຂ້ອຍຕາມທີ່ມີ. ຂ້ອຍບໍ່ໄດ້ເວົ້າຕົວະກັບເຈົ້າ.”
कर्ण उवाच